#मेरा पहला प्यार- अगर वो न होता तो मैं एक सेक्स वर्कर बन जाती| POPxoHindi | POPxo
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#मेरा पहला प्यार- कोठे की अंधेरी दुनिया से निकाल कर उसने मेरी जिंदगी में रौशनी कर दी

#मेरा पहला प्यार- कोठे की अंधेरी दुनिया से निकाल कर उसने मेरी जिंदगी में रौशनी कर दी

कई बार हमारी जिंदगी में कुछ ऐसे हादसे हो जाते हैं जो हमसे सबकुछ छीन लेते हैं और कभी जो खोया है उससे कई गुना ज्यादा मिल जाता है। जरूरी नहीं है कि हर बार किस्मत धोखा ही दे ...हो सकता है कि ऊपरवाला इससे भी कुछ बेहतर सोच रहा हो। इस बार ‘मेरा पहला प्यार’सिरीज में हम आपको बता रहे हैं एक ऐसी ही लव स्टोरी के बारे में, जिसके प्यार ने उसकी अंधेरी दुनिया में उजाला ही उलाजा कर दी। पढ़िए उस गुमनाम लड़की की पहले प्यार की कहानी उसी की जुबानी..


मेरा नाम रोशनी है और मैं बिहार के एक छोटे से गांव की रहने वाली हूं। मैं उस समय सिर्फ 12 साल की थी जब मेरे मां- बाप दोनों ही गुजर गये। मेरा आगे पीछे कोई नहीं था, तो मेरे मुंहबोले मामा मुझे अपने साथ दिल्ली ले आये। मामी को मेरा घर पर रहना बिल्कुल पसंद नहीं था वो दिन- रात मुझे गाली देती, मारती- पीटती रहती थी। मैंने चौथे क्लास तक की पढ़ाई कर रखी थी और मैं आगे पढ़ना चाहती थी। लेकिन पढ़ाई तो दूर मामा- मामी मुझे सोने तक नहीं देते थे। जानवरों से भी बद्दतर सलूक करते थे मेरे साथ। वो दिन आज तक याद है जब मेरे मामा ने पैसों के लालच में आकर मुझे कोठे पर बेंच दिया था। मैं रोती रही, उनके सामने गिड़गिड़ाती रही लेकिन उन्होंने मेरी एक न सुनी और मुझे अपने साथ एक ऐसी बदबूदार, अंधेरी और गंदी जगह ले गये जहां का माहौल देखकर मुझे घिन्न आ रही थी। वहां एक कमला मौसी थी जिन्होंने मुझे अपनी गले से लगया और बोला कि तुझे परेशान होने की जरूरत नहीं है बस आज से तेरा यही घर है और हम सब तेरा परिवार, खुश रहेगी तो मजे में रहेगी नहीं तो यहां तुझे सब तेरा जीना मुश्किल कर देंगे। मुझे ये भी समझाया गया कि जब मैं 18 साल की हो जाउंगी तो मेरी मुंह मांगी कीमत मिलेगी कमला मौसी को और तब मुझे कोई हाथ भी नहीं लगायेगा।


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देखते- देखत कब 2 साल बीत गये पता ही नहीं चला। यहां के सभी लोग मुझे बहुत प्यार करते थे। कमला मौसी तो मुझे अपनी बेटी मानती थी। सच बताऊं तो मैं भी खुश थी कि कम से कम नरक से छुटकारा जो मिला था। अब मेरी बस एक ही ख्वाहिश थी कि जितना समय मिला है कम से कम उसमें आगे कि पढ़ाई ही पूरी कर लूं। बाद में जो होना था वो तो मुझे पता ही था। इसीलिए मैं अपना आज बर्बाद करना नहीं चाहती थी। उन दिनों हमारे कोठे पर एक सोशल वर्कर आईं। उन्हें वहां सब सुमन बहन के नाम से बुलाते थे। कमला मौसी ने उन्हें बताया कि रोशनी पढ़ाई करना चाहती है। तो सुमन बहन ने कहा कि 'नेकी और पूछ- पूछ', बेटा कल से तुम हमारी संस्था में आकर अपनी पढ़ाई शुरू कर सकती हो। ये सुनते ही मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा और मैं अगले ही दिन संस्था पहुंच गई। वहां मेरी मुलाकात सुशील से हुई। वो भी एक सोशल वर्कर था और साथ ही प्रोफेसर भी। जब सुमन बहन ने मेरा परिचय सुशील जी से कराया तो उस समय तक मुझे नहीं पता था कि ये मुलाकात जिंदगी बदल देगी मेरी।


सुशील जी के अलावा भी वहां और कई टीचर थे जो हम जैसी लड़कियों को पढ़ाई में हेल्प करते थे। यहां हमें 5 साल की पढ़ाई 1 साल में पूरी कराई जाती थी। साथ आगे पढ़ने की स्कॉलरशिप भी मिलती थी। समय धीरे- धीरे बढ़ता जा रहा था लेकिन जब सुशील जी मुझसे बात करते तो मानो वक्त थम सा जाता था। उनकी मुस्कुराहट मेरा दिन बना देती थी। एक बार सुशील जी ने मुझसे कहा कि अगर मैं एग्जाम में अच्छे नंबर लाऊंगी तो मैं कुछ भी उनसे मांग सकती हूं। फिर क्या था, रिजल्ट आया और मेरे अच्छे नंबर ही नहीं बल्कि बहुत ही अच्छे नंबर आये थे और साथ ही मुझे विदेश में पढ़ाई करने की स्कॉलरशिप भी मिल गई थी। कमला मौसी की आंखों में आंसू थे उन्होंने कहा हर कोई मुझसा किस्मतवाला नहीं होता जो कोठे से बिना अपनी इज्जत गंवाये बाहर चला जाये। ऊपरवाले की करम थी मुझ पर जो मुझे ये मौका मिला। कमला मौसी ने मुझे कोठे के नियमों से आजाद कर दिया और मेरे पंख खोल दिये उड़ने के लिए। मैं बहुत खुश थी।


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शर्त के मुताबिक सुशील जी ने कहा कि बताओ तुम्हें क्या चाहिए। बहुत घबरा गई थी मैं कि कैसे कहूं मुझे आप चाहिए, आपका प्यार, आपका साथ चाहिए जिंदगी भर के लिए। मैंने बहुत हिम्मत जुटाई और सुशील जी को बोल दिया कि मुझे आप चाहिए। ये सुनकर सुशील जी हैरान रह गये। उन्होंने कहा कि तुम्हारा कहने का मतलब क्या है? तो मैंने उन्हें आई लव यू कहा। लेकिन सुशील जी ने मुझे गले लगाने की बजाय मुझे एक जोर का थप्पड़ मारा और कहा कि तुम जैसे लोग होते ही ऐसे हो, उंगली दो तो हाथ पकड़ लेते हो। तुम जैसे लोगों से तो बस हवस मिटाई जाती है, प्यार नहीं किया जाता। ये शब्द सुनते ही मुझे पता चल गया कि मैंने अपनी औकात से बाहर जाकर कुछ मांगा है जो मुझे आज क्या कभी नहीं मिल सकता। मैं उस दिन बहुत रोई और ये सोचती रही कि क्या हम जैसे लोग प्यार नहीं कर सकते ?


कुछ ही दिनों बाद में आगे की पढ़ाई के लिए विदेश रवाना हो गई। मुझे इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि सुशील जी भी उसी यूनिवर्सिटी से अपनी रिसर्च कर रहे हैं। वहीं कैंपस में मेरा और उनका कमरा आमने- सामने ही था। वो भी मुझसे बात नहीं करते और न मैं उनसे। ऐसे में मेरी विल पावर और भी मजबूत होती जा रही थी। ताकि मैं उस आदमी को दिखा पाऊं कि हम जैसे लोग भी औकात के बाहर सोच सकते हैं। और देखते ही देखते मेरी पढ़ाई भी पूरी हो गई और मुझे एक बड़ी कंपनी में सॉफ्टरवेयर इंजीनियर की पोस्ट भी मिल गई। लेकिन मेरे चेहरे पर वो खुशी नजर नहीं आ रही थी जो मैंने सुशील जी का प्यार पाने के लिए एग्जाम में अच्छे नंबर लाने से आई थी। उस समय पता था कि इसके बदले मुझे उनका प्यार मिलेगा। लेकिन अभी ये नहीं पता था कि इसके बदले मुझे क्या मिलेगा। मैंने अपनी जिंदगी में पहली बार किसी को प्यार किया था लेकिन मुझे बदले में हमेशा नफरत ही मिली। लेकिन अगले दिन जो होने वाला था उसकी तो कल्पना भी नहीं की थी मैंने कभी। जैसे ही मैं दिल्ली एयरपोर्ट पहुंची तो मैंने देखा कि कमला मौसी और बाकि सब लोग गाजे- बाजे के साथ मेरे स्वागत के लिए खड़े थे। और तभी एक लड़का मेरे पास आता है और कहता है कि रोशनी क्या तुम मेरी जिंदगी का उजाला बनोगी, मुझसे शादी करोगी ? मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं। वो लड़का कोई और नहीं बल्कि सुशील जी थे। उन्होंने बताया कि वो भी मुझसे प्यार करते हैं लेकिन अगर उस समय वो इंकार नहीं करते तो मुझे आज जो मुकाम मिला है वो शायद में उन प्यार के पलों में भुला बैठती। न मेरे अंदर वो जुनून रहता और न ही कुछ कर दिखाने की भावना। इसी वजह से सुशील जी ने मुझे अपने आप से दूर रखा।


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आज मेरी और सुशील जी की शादी को 10 साल हो गये हैं। हमारी एक 5 साल की प्यारी सी बेटी भी है। हम दोनों आज उसी संस्था में कई और लड़कियों के भविष्य में रोशनी भरने की कोशिश कर रहे हैं। कमला मौसी ने भी कोठा बंद कर दिया है और वो अब हमारे साथ रहती है। मुझे गर्व है अपने प्यार पर जिसने मुझे एक वजह दी कुछ अपने और औरों के लिए कर दिखाने की।


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Published on Oct 7, 2018
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