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कहानी - उम्र का नाजुक दौर और निम्मो की मासूमियत

कहानी - उम्र का नाजुक दौर और निम्मो की मासूमियत

ये हिंदी कहानी है एक मासूम सी लड़की की, उसके मासूम से कच्ची उम्र के प्यार की और माता-पिता की चिंताओं की...


''सुनो जी ''निकेता ने अपने पति सोहन को रात में बिस्तर पर दूध का गिलास थमाते हुए कहा।


''हां जी बोलिये !'' सोहन ने पत्रिका को बंद करते हुए कहा।


''आप दूध पी लीजिये पहले!'' निकेता ने बैठते हुए कहा।


''हां- हां दूध भी पी लेंगे...और तुम्हारी बात भी सुन लेंगे!'' सोहन ने शरारत से कहा।


''वो मैं कई दिनों से निम्मो के...!''


''क्या हुआ निम्मो को --?'' सोहन ने बीच में ही अपनी पत्नी की बात को काटते हुए पूछा। दोनो की इकलौती और प्यारी संतान है नीमा। प्यार से दोनों उसको 'निम्मो ' कहते हैं।


''आजकल थोडी उदास सी रहती है... गुमसुम सी...ठीक से बात भी नहीं करती...कुछ पूछती हूं तो झल्ला पड़ती है... पता नहीं क्या हुआ है? हर वक्त हंसने वाली हमारी निम्मो की हंसी तो जैसे गायब सी ही हो गयी है!''


''अरे भई इस बार बोर्ड है उसका, दसवीं क्लास में है। पढ़ाई का प्रेशर रहता होगा… तुम भी न। अब बताओ, अभी क्या कर रही है वो?'' सोहन ने दूध का गिलास स्टूल पर रखते हुए कहा।


''अभी दूध देकर आई हूं...पढ़ रही थी, अभी तो रूम की लाइट जल रही है!'' निकेता ने बाहर झांकते हुए कहा।


''मेरे साथ तो ऐसे पेश नहीं आती ---खैर सुबह बात करता हूं तुम भी सो जाओ ---!'' सोहन ने चादर ओढ़ते हुए कहा।


''जी!'' कहते हुए निकेता ने लाइट ऑफ कर दी और करवट लेकर लेट गयी नींद आंखों से कोसों दूर थी। बाहर खिड़की से चांद भी हवा से हिलते परदों की ओट से दिखाई दे जाता था। बहुत देर तक जब नींद नहीं आई तो निकेता धीरे से बिस्तर से उठकर बेटी के कमरे की ओर चल दी।


''खट खट खट !'' दरवाजे की आवाज सुनकर निम्मो ने दरवाजा खोल दिया ।


''अरे मम्मी आप --!'' निम्मो ने आश्चर्य से पूछा।


''हां बेटा, अभी तक जाग रही हो, बारह बज गये। सुबह स्कूल भी जाना है… कैसे उठोगी सुबह?'' निकेता ने बेटी के कंधे पर हाथ रखते हुए बड़े प्यार से कहा।


''हां मम्मी, अभी स्टडी कर रही हूं... बोर्ड एग्जाम हैं न...बहुत पढ़ाई करनी है!''


''ओह, तो इसलिये परेशान है मेरी लाडो!''


''हां मम्मी!''


''अगर सिलेबस कम्प्लीट नही हो पा रहा सेल्फ -स्टडी से, तो कोचिंग ले लो। यह हमारे बराबर में तो है ही 'श्वेता कोचिंग सेंटर '!''निकेता ने बेटी को समझाते हुए कहा।


''ठीक है मम्मी --अब मैं सो जाऊं?''


''हां हां क्यों नहीं, मैं तुम्हारे पास ही सो जाऊं?''


''अरे नहीं मम्मी, कोई बात नहीं मैं सो जाऊँगी। अभी थोडा प्रोजेक्ट वर्क करना है। उसके बाद !'' निम्मो ने हड़बड़ाते हुए कहा।


''ठीक है बेटा, जल्दी सो जाना!''


''ओके मम्मी !''कहते हुए निम्मो ने निकेता के कमरे से निकलते ही दरवाजा बंद कर लिया। निकेता चौंक गयी उसने कुछ कहना चाहा मगर चुप रह गयी।


''गुड मॉर्निग निम्मो बेटा!'' सोहन ने बेटी को जगाकर चाय का प्याला थमाते हुए कहा।


''अरे पापा आप?''


''हां, चलो उठो जल्दी पिओ!''


निम्मो चाय पीने लगी और सोहन वहीं उसके पास बैठ गये।


''क्या हुआ पापा?''


''बेटा मम्मी कह रहीं थीं कि तुम्हारा सिलेबस अभी कम्पलीट नहीं हो पाया और एग्जाम नजदीक हैं !''


''हां पापा !''


''तो ठीक है, आज ही हम ट्यूशन की बात करने चलते हैं।''


''लेकिन कहां पापा ?''


''तुम कहां पढना चाहती हो?''


''पापा मेरे स्कूल के सर हैं, हितेश सर बहुत अच्छी तरह से समझाते हैं। एक बार में ही कॉन्सेप्ट क्लीयर हो जाता है !'' निम्मो ने चहकते हुए कहा।


''ठीक है तुम बात कर लेना !''


''ओके पापा, आई लव यू!'' कहती हुई निम्मो पापा के गले से लिपट गई।


''मम्मी कल से मैं थोड़ा लेट...थोड़ा क्या डेढ -दो घंटे लेट आऊंगी !''


''क्यों ?''निकेता ने उसे लंच-बॉक्स पकड़ाते हुए कहा


''आज से मैं ट्यूशन जा रही हूं!''


''कहां?''


''हितेश सर से!''


''ठीक है...फिर तो ऑटो से आ पायेगी !''


''हां मम्मी मैं आ जाऊंगी !''


''तेरे पापा भी आ जाएंगे पांच बजे तक !''


''अरे नहीं --नहीं मैं नहीं आ पाऊंगा --बॉस से पिटवाओगी क्या ?'' सोहन ने हंसते हुए कहा


''कोई नहीं मम्मी मैं आ जाऊंगी!''


''ठीक है बेटा!'


''बाय!''


''बाय !''दोनों ने हाथ हवा में हिला दिये बेटी स्कूल बस में बैठकर चली गयी।


''कितनी रौनक रहती है न निम्मो से घर में'' सोहन ने भावुक होते हुए कहा


''हां जी!''


''आज तो बहुत खुश लग रही थी। देखा दो मिनट में उसकी समस्या का समाधान कर दिया !'' और फिर दोनों हंस दिये।


''अब भई मैं भी चलता हूं!'' सोहन ने नाश्ता खत्म करते हुए कहा।


''ठीक है, यह रहा आपका लंच -बॉक्स !''


''धन्यवाद मैडम !'' सोहन ने निकेता से कहा और बाय कहता हुआ घर से निकल गया।


''ओहो ---यह लड़की भी न किताबों को कैसे फैलाकर रखती है !'' निकेता ने स्टडी -टेबल की किताबों को समेटते हुए कहा।


तभी उसकी नजर एक डायरी पर पड़ी - ''आई लव यू हितेश सर, मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं। कितने प्यारे लगते हो आप आई मिस यू!'' और भी पूरी डायरी पर हर जगह हितेश सर..हितेश ...हितेश ही लिखा हुआ था...देखकर निकेता सन्न रह गयी।


''ट्रिग ट्रिंग!'' मोबाइल की घंटी बोल उठी।


''हैलो --!''दूसरी तरफ़ से आवाज आई।


''जी, आप कौन?''


''मैं हितेश बोल रहा हूं!''


''हितेश?''


''जी!''


''बोलिये!''


''आज से निम्मो मेरे यहां कोचिंग के लिये आ रही है, देखिये वो अभी बहुत छोटी और मासूम है। उसकी उम्र की मेरी बेटी है, लेकिन यह उम्र का ऐसा पडाव है जिसमें बच्चे भटकते हैं। मैं अपनी तरफ़ से उसे समझाता रहता हूं, आप भी प्यार से बात करिये और समझाइये...ओके !''


कहते हुए फ़ोन कट गया। निकेता की समझ में नहीं आ रहा था कि वो हंसे या गुस्सा करे। मासूम सी निम्मो का मासूम सा चेहरा और उसकी उम्र के इस नाजुक दौर ने उसको मुस्कराने के लिये मजबूर कर दिया।


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ये कहानी राशि सिंह ने लिखी है।

Published on Feb 17, 2018
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