हिन्दी दिवस : नई वाली हिन्दी को मिल रहा है असीम प्यार | POPxo Hindi | POPxo
Home  >;  Lifestyle  >;  Entertainment  >;  Books
हिन्दी दिवस : युवाओं को खूब पसंद आ रही है ‘नई वाली हिन्दी’

हिन्दी दिवस : युवाओं को खूब पसंद आ रही है ‘नई वाली हिन्दी’

बीते कुछ वर्षों से युवाओं में हिन्दी नॉवेल्स के प्रति दिलचस्पी बढ़ी है। जहां पहले अंग्रेजी के प्रसिद्ध नॉवेल्स के हिन्दी ट्रांसलेशंस ही युवाओं को भा रहे थे, वहीं अब नई वाली हिन्दी के ओरिजिनल कंटेंट की भाषा भी उन्हें समझ में आ रही है। अब वे हिन्दी सिर्फ उतनी ही नहीं पढ़ते हैं, जितनी उनके सिलेबस में हो, बल्कि नए हिन्दी नॉवेल्स के रिलीज़ होने का भी बेसब्री से इंतज़ार करते हैं। हिन्दी दिवस के मौके पर हिन्दी के पाठकगण को हार्दिक बधाई!


आम बोलचाल वाली आसान भाषा


हिन्दी नॉवेल्स का ज़िक्र होते ही रीडर्स के मन में कठिन हिन्दी भाषा का ख्याल आने लगता है और वे इनके बारे में चर्चा करने में झिझक महसूस करते हैं, खासकर वे यंगस्टर्स, जो बस एग्ज़ैम पास करने के लिए हिन्दी साहित्य से जुड़े होते हैं। बीते कुछ समय से हिन्दी नॉवेल्स की भाषा और कहानी को लेकर लोगों का भ्रम टूटा है। कुछ नए लेखकों व प्रकाशकों ने प्रयोग कर नई वाली हिन्दी को युवाओं की पहली पसंद बना दिया है। इसमें आम बोलचाल वाली ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे हर कोई आसानी से समझ सके। इसके लिए युवाओं को न तो किसी डिक्शनरी के पन्ने पलटने पड़ते हैं और न ही हिन्दी के किसी ज्ञाता की मदद की ज़रूरत होती है।


हिन्दी से हो गई दोस्ती


इस नई वाली हिन्दी ने युवाओं को हिन्दी के करीब ला दिया है। वे अब हिन्दी पढ़ने के साथ ही अपने विचारों को भी आसानी से इसी तरह प्रकट करने लगे हैं। रीडर उत्पन्ना चक्रवर्ती बताती हैं, ‘इन किताबों को पढ़ने के बाद लगता है कि हिन्दी किताबों के दिन भी बदल गए हैं। पिछले कुछ सालों में एक से बढ़कर एक हिन्दी नॉवेल्स आए हैं। इनमें साधारण बोलचाल का इस्तेमाल किया जाता है, जो हर किसी को आसानी से समझ में आ जाए। ये किसी अंग्रेजी किताब का हिन्दी में अनुवाद नहीं हैं इसलिए भी इनके किरदार ओरिजिनल लगते हैं।’ हर्षिता श्रीवास्तव, जो हिन्दी की किताबों से दूर भागती थीं, भी नॉवेल ‘मसाला चाय’ के किरदारों से खुद को आसानी से रिलेट कर पाईं थीं। वे बताती हैं कि इस नॉवेल को पढ़ने के बाद उन्हें हिन्दी कठिन लगने के बजाय अपनी सी लगने लगी।


71413lcEXiL. AC UL320 SR212 320


अब हिन्दी भी है ‘वेरी कूल’


नॉवेल ‘कुल्फी एंड कैपुचिनो’ के लेखक आशीष चौधरी कहते हैं कि वक्त के साथ सब बदलता है, ऐसे में कहानियां, किरदार और उनकी भाषा का बदलना भी बहुत ज़रूरी है। जब तक रीडर किसी किरदार से खुद को जोड़ कर नहीं देख पाएगा, तब तक वह उसमें दिलचस्पी नहीं लेगा। नई वाली हिन्दी से हमें हिन्दी के वे पाठक वापस मिले हैं, जो सरल अंग्रेजी के नॉवेल्स की ओर जाने लगे थे। वे यह भी मानते हैं कि इन किताबों के किरदार हमारे आसपास के ही लगते हैं। जब रीडर को महसूस होता है कि किरदार उसकी तरह बोलता और सोचता है तो वह उससे बहुत जल्दी कनेक्ट हो जाता है।


अनुराग और नेहा की कूल लव स्टोरी को Kulfi And Cappuccino में (135 रुपये) पढ़ा जा सकता है।


हिन्दी का है अंदाज़ नया


इस नई वाली हिन्दी में ‘कुल्फी एंड कैपुचिनो’, ‘मसाला चाय’, ‘मुसाफिर कैफे’, ‘नमक स्वादानुसार’, ‘यूपी 65’, ‘ठीक तुम्हारे पीछे’, ‘ज़िंदगी आइस पाइस’, 'बनारस टॉकीज़', 'दिल्ली दरबार' और ‘नीला स्कार्फ’ जैसी कुछ बेहतरीन किताबें शामिल हैं। हिन्दी के नए रीडर्स की नब्ज़ पहचान चुके प्रकाशन समूह हिंद युग्म के सारे नॉवेल्स नई वाली हिन्दी में ही लिखे गए हैं, जिनकी कहानियों व लेखकों को दर्शकों को खूब प्यार मिल रहा है। दिव्य प्रकाश दुबे और सत्य व्यास जैसे लेखकों ने नई वाली हिन्दी को ही अपनी शैली बना लिया है।


9789386224194


सुधा और चंदर की तरह 75 रुपये मेें Musafir Cafe में बनाइए अपनी एक खास विश लिस्ट।

Published on Nov 13, 2017
Like button
3 Likes
Save Button Save
Share Button
91 Shares
Read More
Trending Products

Your Feed