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#MyStory: अपने Parents की हां के लिए मैंने दो साल इंतजार किया!

मैं एक खुश और शादीशुदा लड़की हूं जिसकी लव स्टोरी बॉलीवुड स्टाइल की है। चाहे अपने प्यार के लिए मुझे दो साल का टॉर्चर सहना पड़ा, पर मैं आज  बहुत खुश हूं कि मेरे पास शेयर करने के लिए एक कहानी है और ऐसी कहानी जो हम दोनों को हमेशा साथ रखेगी और याद रहेगी।

ये सब 7 साल पहले शुरु हुआ। अपनी बहन की शादी की तैयारियों के दौरान मैं कबीर से मिली थी। वो मेरे होने वाले जीजू का बेस्ट फ्रेंड था और उसके प्यार में पड़ने में मुझे ज़्यादा वक्त नहीं लगा। वो चाहे दिखने में ज़्यादा अच्छा नहीं था पर उसे बातें करना अच्छे से आता था। वो एक charmer था और उस से attract होना लाज़मी था।

हमारा रिश्ता लगभग बिना कहे-सुने, किसी औपचारिकता के बगैर शुरु हो चुका था। न ही दूसरे से कुछ पूछना पड़ा,  न ही कहना पड़ा। बस समझ लिया गया था। हम बहुत अच्छे दोस्त बने और फिर एक दूसरे से प्यार करने लगे। हम एक साल में ही जान गए थे कि हम इसे आखिरी सांस तक निभाना चाहते हैं। कबीर मेरे पेरेंट्स के काफी करीब आ गया था और मुझे पता था कि हमारे रिश्ते से वो thrill  हो जाएंगे। लेकिन मैं गलत थी.... बिल्कुल गलत।

उन्हें अपने रिश्ते के बारे में बताने पर मुझे ऐसा कुछ देखने को मिला जिसका मुझे idea तक ना था। वो हमारे बिल्कुल ही खिलाफ थे लेकिन जिस तरह उन्होंने रिएक्ट किया वो हम दोनों के ही लिए shocking था। सबने मुझसे मुंह मोड़ लिया था, यहां तक की मेरी बहन और जीजू ने भी… कोई भी इस messed up situation में नहीं फंसना चाहता था।

अब तक मेरी फैमिली लाइफ बहुत अच्छी चल रही थी पर इन रोज़ रोज़ के झगड़ों ने मुझे बहुत दुखी कर दिया था। मैं आगे पढ़ने और नौकरी ढूंढने की चाहत खो चुकी थी। मेरी मम्मी depression में जा चुकी थी और पापा को मैंने पहली बार रोते हुए देखा था। मैं पूरा दिन बस यू हीं शहर में निकल जाती थी और बेमतलब इधर-उधर घूमती रहती थी या बिल्डिंग की छत पर बैठी रहती थी। मेरा परिवार बिखर रहा था और ये समाज में तमाशा बन रहा था। पड़ोसियों को रात में चीखें और रोना सुनाई देता था और चुगलखोर आंटियां इसे और खराब बना रहीं थीं।

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मुझे पता है कि मां बाप हमेशा बच्चों का अच्छा ही चाहते हैं और इसी वजह से मैंने हमेशा उनका कहा माना। पर इस बार मुझे पता था कि वो बेकार की बात पर अड़े हैं। उन्हें कबीर का काम पसंद नहीं था, जबकि यह एक respected profession था। उन्हें उसका रंग-रूप पसंद नहीं था, दूसरी caste का था, उनके मुताबिक वो बहुत अच्छी फैमिली का भी नहीं था.. जैसे परिवारों के रिश्ते उनके पास आ रहे थे, कबीर उन जैसा नहीं था।

ये 2 साल बहुत भयानक थे। सब कुछ यहां तक कि मेरा करियर, मेरी सेहत, मेरा चैन खत्म हो रहा था। मेरे मम्मी-पापा की सेहत भी गिरती जा रही थी और घर का माहौल खाने को दौड़ता था। मैं जानती थी कि उन्हें ये मैच इतना भी बुरा नहीं लगता। पर इस तरह का माहौल सहकर भी वो अपना फैसला बदल नहीं रहे थे, ये देखकर मुझे बहुत गुस्सा आता था।

इस सबसे गुज़रने के दौरान कबीर का प्यार और साथ मुझे शक्ति देता रहा। हमने कईं बार भागने का भी सोचा पर पता था कि इसके नतीजे बहुत बुरे हो सकते हैं और इसीलिए ऐसा नहीं किया।

ये 2 साल हमारे लिए बहुत मुश्किल थे पर हम दोनों strong बनकर निकले। मुझे पक्का विश्वास है कि इतने लम्बे trauma के बाद  कोई भी लड़का चला जाता पर कबीर मेरे साथ ख‌ड़ा रहा और ये उसका भरोसा ही था जिसने मुझे भी हौसला दिया।

2 साल के बाद finally मेरे मम्मी-पापा ने हां कह दिया। मुझे इसका कारण तो नहीं पता पर एक दिन उन्होंने मेरे प्यार के आगे हार मान ली। एक बार फिर कबीर को उनका दिल जीतने में ज़्यादा वक्त नहीं लगा और वो उनका favorite दामाद बन गया।

हमारी ज़िंदगी बहुत खुशनुमा हो गई है और शादी के 3 साल बाद भी हम इस तरह प्यार में हैं जैसे अभी अभी एक दूसरे से मिले हों।

Images: shutterstock

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Published on Apr 13, 2016
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