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#MyStory: उससे प्यार करने के एक साल बाद मैं उससे मिली..

Sunday, 30th March- ये दिन हम दोनों के लंबे इंतेज़ार को ख़त्म कर रहा था. हम दोनों एक साल पहले ऑनलाइन मिले थे और text messages, calls, skype के ज़रिए हमने एक दूसरे को अच्छे से जान लिया था..ऑनलाइन ही हमें एक दूसरे से प्यार हो गया था और अब हम finally मिल रहे थे.

मैं अपने पसंदीदा रेस्तराँ में कोने की टेबल पर उसके आने का इंतज़ार कर रही थी। उस कुर्सी पर मैं comfortably बैठी थी पर अंदर से मैं बहुत नर्वस थी। रेस्तराँ का स्टाफ मुझे देखकर हैरान था कि जो लड़की नयी-नयी dishes ट्राइ करती थी वो आज एक ड्रिंक भी ऑर्डर नहीं कर रही थी।

मैं अचानक ही सब कुछ notice करने लगी थी- एसी से ठंडी हवा जो मेरे पैरों पर लग रही थी... मैं बार बार अपने बालों को ठीक कर रही थी- पता नहीं मैं आज ही अपने बालों को लेकर इतनी fussy क्यों हो रही थी...मुझे खुद अजीब लग रहा था। मैंने अपना fluorescent पिंक सूट चेक किया कि कहीं वो खराब तो नहीं हो गया.. पैरों की तरह अब मेरे हाथ भी ठंडे पड़ रहे थे।

मैं अपना फ़ोन बार बार चेक कर रही थी- न कॉल न मैसेज.. उसका इंतज़ार करते करते, पुरानी यादें दस्तक देने लगीं- उसकी आवाज़, उसकी मज़ाकिया बातें जो हमेशा ही गुदगुदाती थी, उसकी टोन जब वो सीरीयस होता था।

मैं अपने आपको शांत कर रही थी क्योंकि मैं finally उससे मिलने वाली थी पर मेरा दिमाग़ तो हर तरफ भाग रहा था। इस दिन के सपने मैंने पूरे साल देखे थे। क्या ये उतना ही amazing और romantic होगा जैसा कि मैंने imagine किया था?met-him-for-the-first-time

हम दोनों एक दूसरे को एक साल से जानते थे पर फिर भी मेरे दिल में कुछ uncertainties थीं। पर मैं नहीं चाहती थी कि उसे ऐसा कुछ भी महसूस हो, वो भी तब जब हम पहली बार मिल रहे थे और रेस्तराँ का ये कॉर्नर और वहाँ चल रही melodies मुझे कुछ कुछ शांत कर रही थी।

तभी फ़ोन की घंटी बजी और मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा...वो उसी का कॉल था। मैंने पीछे मुड़कर देखा, वो रेस्तराँ के बाहर खड़ा था... उसने काले रंग की टीशर्ट पहनी थी और उसके चेहरे पर उसकी वो मुस्कान थी जो मेरी सुबह को रोशन कर देती थी। अब वो मुझसे मीलों दूर नहीं बल्कि मेरे बहुत पास था।

उसके अंदर कदम रखते ही मैंने उसे गले से लगा लिया और उसकी बाहों में समा गयी। अब हमारे बीच कोई दीवार या दूरी नहीं थी, बस वो और मैं... मुझे उसकी मज़बूत बाहों का अहसास अच्छा लग रहा था और मेरे गाल उसकी गर्दन से छू रहे थे। मैंने आँखें बंद करके उसे और कस कर गले से लगा लिया। हम दोनों की दिल की धड़कनें बहुत तेज़ चल रही थीं। उसकी बाहों से ज़्यादा महफूज़ मैंने अब तक कहीं नहीं महसूस किया था... अब मेरा मन बिल्कुल शांत था... कोई उथल-पुथल नहीं थी, कोई शक नहीं था...मुझे अच्छा लग रहा था।

Images: Shutterstock

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Published on Apr 06, 2016
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