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#MyStory: और मेरी होली के सारे रंग ही धुल गए...

#MyStory: और मेरी होली के सारे रंग ही धुल गए...

तब मैं कॉलेज में पढ़ती थी, दिल्ली युनिवर्सिटी में। आज से करीब 4 साल पहले की बात है। यहां cultural fest चल रहे थे और मैं ये सब मिस करने को तैयार नहीं थी। पर मुझे घर भी जाना था, 8 मार्च को होली थी.. हर हाल में घर जाना था। होली मुझे बेहद पसंद है, मैं इसे लेकर पूरे साल excited रहती हूं। ये पहला साल था जब मैं घर से बाहर थी, और मेरे उस पहले प्यार का भी पहला ही साल था। नहीं-नहीं, मैं यहां दिल्ली आकर किसी के प्यार में नहीं पड़ी थी। मेरा प्यार तो मेरे अपने शहर में ही था। मैं पढ़ने के लिए दिल्ली आ गई थी लेकिन वो कानपुर में ही इंजीनियरिंग कर रहा था। मुझे उससे प्यार है, इसका अहसास भी मुझे तब हुआ जब मैं कानपुर से दिल्ली आई...उसकी नज़र में शायद हम दोनों अब भी बहुत अच्छे दोस्त ही थे..इसलिए इस बार मैं होली मिस करने की सोच भी नहीं सकती थी। मैं घर पहुंच गई थी और बेहद खुश थी। दिल्ली से अपने शहर जाना अपने आप में खुशी की बहुत बड़ी वजह थी।
उसके sessional exams उसी दिन खत्म होने थे और उसके बाद उसका कॉलेज बंद होने वाला था। मतलब होली से पहले उसके कॉलेज का आखिरी दिन था। मैं उससे मिलने को बेताब थी पर उसके कालेज के दोस्त भी बिना होली खेले उसे आने नहीं दे रहे थे। कई बार फोन किया पर वो चाहकर भी नहीं आ पा रहा था। उसने बोल दिया, “बाबू तुम वेट मत करो, मैं यहां से निकल भी गया तो इस कंडीशन में बिल्कुल नहीं हूं कि हम लोग कहीं घूमने जा सकें।” मैंने पूछा कि क्या हो गया, ऐसी क्या प्रॉब्लम है? उसने बहुत प्यार से कहा कि आज लास्ट डे है इसलिए सब होली खेल रहे हैं। मुझे बिल्कुल गुस्सा नहीं आया। मैंने खुश होकर कहा कि, “कोई बात नहीं, खूब एंजॉय करो लेकिन फ्री होकर एक बार आना ज़रूर, मैं तुम्हें देखना चाहती हूं।” उसने हंसकर कहा, “क्या देखोगी? पूरे चेहरे पर रंग लगा हुआ है। घर जाकर ही ये सब साफ हो पाएगा।” अब मैंने थोड़ा तेज़ बोला - साफ मत करना, ऐसे ही आना। मुझे देखना है कि तुम रंगों में लिपटे कैसे लगते हो। मुझे पता है कि हम होली के दिन नहीं मिल पाएंगे। कम से कम सुबह तो बिल्कुल नहीं। मैं तुम्हें रंगों में डूबा हुआ देखना चाहती हूं। वो मुस्कुरा रहा था, मैं उसे महसूस कर पा रही थी। वो मुझे समझाने की कोशिश कर रहा था कि उसे ऐसे नहीं आना चाहिए और मैं इस ज़िद्द पर थी कि मुझे उसे वैसे ही देखना है। उसने आखिरी में कहा, “पता नहीं क्या देखना है तुम्हें.. चलो देख लेना।”
internal holi मैंने फोन रख दिया और बैठे-बैठे सोचने लगी कि वो कैसा लग रहा होगा। कितना stunning लग रहा होगा। वैसे भी वो इतना हैंडसम है कि मेरी बहन उसकी तारीफ़ करते नहीं थकती। रंगों में कितना खिल जाएगा न वो.. मेरे दिमाग में हज़ारों ख्याल दौड़ रहे थे। उसे यहां पहुंचने में आधा घंटा लगता। वो घर तक नहीं आने वाला था, घर के पास वाली by-pass road पर ही मिलने वाले थे हम। मैंने मम्मी से कहा, “मम्मी वो कॉलेज से निकल चुका है और थोड़ी देर में आ जाएगा।” मम्मी ने पूछा, “कहां आ रहा है, घर पर?” “नहीं, बाई-पास रोड पर, ट्रांसफॉर्मर के पास।” “तो तुम मिलने जाओगी?” “मन तो है मम्मी, मुश्किल से 5 मिनट लगेंगे।” “5 मिनट? 5 मिनट में क्या मिलोगी?” “बहुत ज़रूरी काम है मम्मी..कुछ नोट्स की बात करनी है” मैंने बहाना बनाया। मैं कहते-कहते इतनी खुश थी कि मम्मी मना नहीं कर पायीं, उन्होंने कहा, “ध्यान से जाना, पापा के आने का वक्त हो गया है, वो भी उधर से ही न आ जाएं।” मैंने बहन को भी साथ चलने को कहा, इसलिए नहीं कि मैं अकेले मिलने में comfortable नहीं थी बल्कि इसलिए क्योंकि मैं सड़क पर अकेली वेट नहीं करना चाहती थी। हम दोनों उस हाइवे पर खड़े इंतज़ार कर रहे थे। तभी उसकी बाइक रुकी, चेहरे पर लाल और हरा रंग लगा था। मुझे उसकी आंखें और उसके बाल बेहद पसंद थे। मैं देखती रह गई और वो नज़रें झुकाए मुस्कुरा रहा था। रंगों में वो इतना attractive लग रहा था कि मेरा बस चलता तो मैं उसे 2 घंटे बिठाकर ऐसे ही देखती रहती। पर मुझे सिर्फ़ कुछ मिनट के लिए रुकना था। हमने बहुत बातें नहीं कीं बस एक-दूसरे को देख रहे थे। मैं आस-पास भी देख रही थी...मुझसे रहा नहीं गया..मुझे अपने प्यार का इज़हार करना था..उसे बताना था कि मैंं उससे कितना प्यार करती हूं..मैंने बिना कोई भूमिका बांधे साफ कह दिया, “I Love you sahil! तुमसे दूर जाकर इसका अहसास हुआ कि मैं तुम सिर्फ मेरे अच्छे दोस्त नहीं हो..दोस्त से ज्यादा बन चुके हो”.. मुझे लगा था साहिल ये सुनकर खुश हो जाएगा..या शायद ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगेगा..लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.. बल्कि उसका मुंह उतर गया। उसने कहा “लेकिन मैं तो किसी और से प्यार करता हूं यार..तुम्हं बताने ही वाला था.. तुम मेरी बेस्ट फ्रेंड हो..पर प्यार...”
एक झटके में मेरी होली से सारे रंग काफूर हो गए...मेरी होली बेरंग हो गई..बस होलिका की आग मैं महसूस कर पा रही थी..मैं कुछ नहीं बोल सकी.. “कोई बात नहीं साहिल...अच्छे दोस्त तो हम हमेशा रहेंगे..” साहिल ने आगे कुछ भी कहने की कोशिश नहीं की...वो वहां से चला गया। उसके बाद हमारी दोस्ती भी वैसी नहीं रही..वो मुझे avoid करने लगा था..मैंने भी उसे मनाने या जानने की कोशिश नहीं की..मेरा पहला प्यार अधूरा रह गया था। उस होली पर उसने मिलने से पहले कहा था कि वो चाहता है, वो मुझे सबसे पहले रंग लगाए। लेकिन सबसे पहले क्या..उसने तो मुझसे ही सारे रंग छीन लिए। उसके बाद आज तक मैं किसी होली पर घर नहीं जा सकी। पर जिस होली पर मैं जान छिड़कती थी वो होली भी हर बार ऐसे ही बीतती रही। मतलब उस होली के बाद मैंने कोई होली मनाई ही नहीं, मैंने होली खेली ही नहीं। इस बार फिर से घर जाने का मन है। लेकिन मैं जानती हूं कि अब मेरी होली कभी पहले जैसी नहीं हो पाएगी।
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Published on Mar 22, 2016
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