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#MyStory: हम दोनों के बीच 'वो' हो ही रहा था कि तभी…

वो शनिवार की एक सुबह थी और मैं अपने boyfriend के घर पर थी। उसने अभी अभी एक नए घर में शिफ्ट किया था जहां वो अकेला रहता था..एक sharing फ्लैट में रहने के बाद उसने यह घर इसीलिए लिया था कि हमें कुछ privacy मिल सके! इसलिए यह मौका था सेलिब्रेट करने का और हम दोनों उसी की प्लानिंग कर रहे थे! हमने हर कमरे को inaugurate करने की सोची… अपने खास अंदाज़ में! You know what I mean…right?? ;) उस घर में एक लिविंग रूम था और एक बेडरुम। लेकिन कोई भी फ्लैटमेट न होना अपने आप में एक खास तरह की आज़ादी का अहसास था और हम दोनों वो feel करना चाहते थे!!

घर के सारे परदे डालने के बाद हमनें पहले लिविंग-रूम को ट्राय करने का मन बनाया। एक hot and heavy session के बाद अब बारी बेडरूम की थी ताकि बात आगे बढ़ाई जाए। वैसे तो ये काम हम लिविंगरूम में रखे सोफे पर भी कर सकते थे लेकिन वो एक सेकेंड हेंड पुराना सा सोफा था...जिसके मुकाबले में ज़ाहिर है कि बेडरूम का आरामदायक बेड ज्यादा मज़ा देता।

मैं बेडरूम में आराम से बेड पर लेटी थी और वो मेरे neck पर पूरी शिद्दत से प्यार कर रहा था कि तभी...हमनें दरवाजे की आवाज सुनी। “ये क्या था?” मैं एकदम से बैठ गई। घर में हम दोनों के अलावा और कोई नहीं था।

“पड़ोसी ने शायद अपने घर का दरवाज़ा जोर से बंद किया होगा,” जय ने कहा। “तुम इधर-उधर ध्यान मत दो! हम FINALLY अकेले हैं, okay?” यह कहते हुए उसने मेरी ब्रा का हुक खोल दिया।

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लेकिन अचानक ज़ोर से आवाज़ आई। ऐसा लगा कि किसी ने लिविंग रूम में रखी कुर्सी को जोर से उलट दिया है।

“ये क्या है यार!!” जय कहते हुए उठा। मैंने जल्दी से अपना टॉप ढूंढा लेकिन वो कहीं नहीं था। कहीं मकान मालिक के पास दूसरी चाबी तो नहीं है? कहीं वो अंदर तो नहीं आ गए? यही देखने के लिए आ गए हों कि क्या हो रहा है? Oh god, मेरा टॉप कहां है???

हड़बड़ाहट में मैंने उसकी शर्ट उठाकर पहन ली। मेरा टॉप बाहर सोफे पर पड़ा था इसलिए हमारे पास कोई बहाना नहीं था कि हम बेडरूम में आखिर कर क्या रहे हैं।

मेरे शर्ट पहनने के बाद जय ने धीरे से दरवाज़ा खोलकर बाहर देखा। “Okay, यह बहुत अजीब है,,” वो फुसफुसाया। “बाहर कोई नहीं है लेकिन फिर कुर्सी किसने गिराई?”

यह सच में अजीब था। मैंने भी जय के पीछे से खड़े होकर बाहर देखा।
सच में लिविंग रूम खाली था। लेकिन बालकनी का दरवाजा खुला हुआ था और कुर्सी पक्का गिरी थी क्योंकि जब हम बेडरूम में आए थे तो वो सीधा रखी हुई थी। हवा का नामोनिशान भी न था इसलिए कुर्सी कम से कम हवा से तो नहीं गिरी थी।

“क्या हमें किसी को बुलाना चाहिए?” मैंने कहा। कहीं फ्लैट में कोई चोर तो नहीं आ गया? या फिर कहीं इस घर में भूत तो नहीं है?! मैं बुरी तरह से डर गई थी।

हम बेडरूम के दरवाजे पर ही खड़े होकर ये सब सोच ही रहे थे कि तभी रसोई की तरफ से कुछ कपड़े अपने ऊपर डाले एक बंदर आ गया!!

“WHAT THE HELL?” जय चिल्लाया। मैं भी डर के मारे कांप गई।

वो सच में बहुत ही बड़ा बंदर था। दिल्ली में अक्सर दिखने वाले छोटे छोटे बंदरों जैसा नहीं… बल्कि सच में बहुत ही ज्यादा बड़ा बंदर...जिसे देखकर लग रहा था कि शायद ये अभी अभी सीधा जंगल से आ रहा है...वो हम से बस कुछ कदम की दूरी पर खड़ा था। बिना पलक झपकाए हमारी ही तरफ देख रहा था।

हमने बंदर की तरफ देखा, बंदर ने हमारी तरफ देखा। तभी रसोई से दो और बंदर निकलकर वहां आग गए....अब ये तीन बड़े बड़े बंदर हमारे लिविंगरूम में खड़े होकर हमें ही देख रहे थे।
मैं और नहीं देख सकती थी। मैंने जय को कमरे में अंदर खींचा और जोर से दरवाजा बंद कर दिया।

“Babe, अब हम क्या करेंगे?” जय ने कहा।

“मुझे नहीं पता। लेकिन तुम इतना धीरे क्यों बोल रहे हो?” मैंने घबराते हुए जय से पूछा।
“मुझे बंदरों से बहुत डर लगता है यार,” जय ने कहा। “अगर वो यहां अंदर आ गए तो?? क्या मैं मकान मालिक को बुला लूं?”

“और उनको क्या कहेंगे? मेरे कपड़े अभी भी बाहर हैं!”

अब बाहर एकदम खामोशी थी...बस बाहर सड़क पर चलते ट्रैफिक की आवाज़ आ रही थी.. बीच बीच में कुत्तों के भौंकने की आवाज भी आ रही थी।

“शायद बंदर चले गए हैं?” मैंने कहा। “क्या तुमने बालकनी का दरवाजा बंद नहीं किया था?”

“नहीं,” जय ने कहा। “Anyway, उन्हें अंदर आने के लिए दरवाजे का हैंडल घुमाना पड़ेगा..वो ये कैसे करेंगे?”

“वो ये काम कर सकते हैं..उनके अंगूठे की बनावट ऐसी होती है, you idiot!” मैंने गुस्से में कहा। “यकीन नहीं होता मैं ऐसे बेवकूफ को डेट कर रही हूं!”

पांच मिनट इंतजार करने के बाद हमने फिर से बाहर देखने की सोची...वैसे सच कहूं तो मैंने बाहर देखने की सोची। मैं इस तरह चुपचाप बैठकर इंतजार नहीं कर पा रही थी और जय ने साफ मना कर दिया था कि वो बाहर चेक नहीं करेगा!!

मैंने दरवाज़ा खोला। बाहर का नज़ारा कुछ कम खतरनाक नहीं था। एक बंदर बालकनी के दरवाजे पर खड़ा हुआ था, शायद बाहर के नजारे का मजा ले रहा था। दूसरा बंदर आराम से सोफे पर लेटा हुआ था...मेरे टॉप के ऊपर। तीसरा बंदर मेरा yummy favourite नॉनवेज सैंचविच खा रहा था जो मैं बहुत मन से लाई थी और जिसे मैंने फ्रिज में रखा था। What the fuck? क्या बंदर non-vegetarian होते हैं?!

अच्छी बात ये थी कि वो बंदर हम दोनों में बिल्कुल भी interested नहीं लग रहे थे। और बुरी बात ये थी कि वो फिलहाल घर से बाहर जाने में भी interested नहीं लग रहे थे।

“क्या तुम कुत्ते की तरह भौंक सकती हो?” जय ने मेरे पीछे खड़े होकर धीरे से पूछा।

“क्या?!” मैंने हैरानी से पीछे मुड़कर उसे देखा।

“मैंने अभी अभी Google पर पढ़ा है – बंदर कुत्तों से डरते हैं।” मेरे उस डरपोक boyfriend अपनी बुद्धिमानी का परिचय दिया।

मुझे गुस्सा तो बहुत आया लेकिन फिर मैंने सोचा कि चलो ये भी करके देख लेते हैं। आखिर उस वक्त और चारा भी क्या था मेरे पास? वो तीन थे और हम दो, और उन्हें देखकर लग रहा था वो मिलकर हम दोनों को नाश्ता बनाकर खा सकते हैं। जिस तरह से वो बंदर मेरा सैंडविच खा रहा था मुझे लग रहा था कि इसके बाद वो जरूर किसी बड़े खाने की तलाश करेंगे।

“भौं! भौं!” मैंने भौंकने की आवाज निकाली, पूरी कोशिश की कि एक खूंखार कुत्ता लगूं।

लेकिन इससे बंदर ज़रा भी डरते नज़र नहीं आए। लेकिन वो शायद इससे irritate जरूर हो गए। तीनों ने फौरन अपना अपना काम छोड़ा और मेरी तरफ से गुस्से से देखा। मैंने तुरंत दरवाजा बंद किया और अंदर से लॉक कर लिया...मुझे सबक मिल चुका था!

अगले 15 मिनट और ज्यादा खतरनाक थे। पहले की वो खामोशी अब जबरदस्त शोर में बदल चुकी थी। बाहर बंदरों ने आतंक मचाना शुरू कर दिया था...वो चीजें पटक रहे थे, ग्लास तोड़ रहे थे, सामान फेंक रहे थे। जय और मैं मान चुके थे कि अब कभी भी वो बेडरूम का दरवाजा तोड़कर अंदर जाएंगे।

“वो जानवरों को कंट्रोल करने वालों को फोन करते हैं,” मैंने जय से कहा।

“Um. मुझे नहीं पता कि दिल्ली में वो animal control वाले हैं या नहीं,” उसने कहा।

“अरे होंगे! या फिर हम पुलिस को फोन कर देते हैं?”

यहां हम जब बहस कर रहे थे कि किसे फोन करके बुलाएं बाहर धीरे धीरे आवाज़ें कम होने लगी...कुछ देर बाद बाहर फिर से एकदम खामोशी छा गई।

मैंने एक बार फिर अपनी सारी हिम्मत जुटाकर दरवाजा खोलकर बाहर देखा।
बाहर अब कोई नहीं था।

“मेरे साथ बाहर आओ,” मैंने जय से कहा। “मैं किचन में चेक करना चाहती हूंI”

“Babe, तुम जाकर चेक कर लो न,” जय ने कहा।

“जय मलहोत्रा, अभी के अभी मेरे साथ बाहर आओ,, वर्ना मैं तुम जैसे डरपोक इंसान को छोड़ दूंगी!” मैं गुस्से में चिल्लाई।

यह सुनकर जय कुछ हिला। हम दोनों बेडरूम से बाहर निकलकर लिविंगरूम में आए जहां का नजारा ऐसा था जैसे यहां अभी अभी कोई युद्ध खत्म हुआ हो। कुर्सियां सारी उलटी पड़ी थी, कमरे की सजावटी चीजें टूटी फूटी पड़ी थी, कुशन और पदरे फटे हुए थे। यहां तक की मेरा वो प्यारा टॉप भी टुकड़े टुकड़े होकर पड़ा हुआ था। अगर कोई चीज बिना किसी नुकसान के नजर आ रही थी तो वो थी वो सड़ा सा सोफा!

रसोई का हाल भी कुछ ऐसा ही था। चारों तरफ टूटे हुए ग्लास के टुकड़े और जमीन पर स्टील के बर्तन पड़े हुए थे। फ्रिज का दरवाजा खुला हुआ था। सारा खाना ज़मीन पर बिखरा हुआ था।
बंदर घर से जा चुके थे।

“Fuck,” जय ने कहा। “मेरे मकान मालिक तो मुझे मार ही डालेंगे।”

मैंने कहा, “चलो अब सफाई करते हैं।”

और इस तरह हमने अपने उस घर का inauguration किया।

Images: shutterstock

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Published on Mar 04, 2016
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