#MyStory: उसका प्यार सच्चा था लेकिन मैंने उसे खो दिया.. | POPxo

#MyStory: उसका प्यार सच्चा था लेकिन मैंने उसे खो दिया..

Anonymous

Guest Contributor

“मैं तुमसे वादा करता हूं, मैं तुम्हें दुनिया की सबसे खुशकिस्मत लड़की बना दूंगा..बस तुम मुझे ये करने की इजाज़त दे दो। हम दोनों पूरी दुनियाा घूमेंगे, मैं कभी तुम्हारे सपनों के बीच में नहीं आऊंगा..क्या तुम सच में किसी ऐसे अन्जान लड़के से शादी कर लोगी जिसे तुम जानती भी नहीं? क्या मुझे तुम दूसरा चांस नहीं दोगी? ऐसा क्या हो गया सना? बताओ मुझे...मैं आज भी तुमसे बहुत प्यार करता हूं और हमेशा करता रहूंगा...” ऋषि ने ये मैसेज मुझे भेजा।

एक साल पहले मैंने ऋषि के साथ ब्रेकअप कर लिया था। हमारी मुलाकात कालेज में हुई थी। उस वक्त उसे मेरी बेस्ट फ्रेंड पसंद थी...और मैं उसकी हेल्प कर रही थी ताकि वो और मेरी बेस्ट फ्रेंड आपस में मिल जाएं!! लेकिन सारा दिन ये कोशिश करते करते मैं और ऋषि ही करीब आ गए। हम सारा दिन एक दूसरे को मैसेज करते थे..रात में भी बात करते थे..और इन्हीं सब में हमें एक दूसरे से ही प्यार हो गया।

इस बात को पांच साल हो गए जब मुझे ऋषि से प्यार हुआ था। हम दोनों एक दूसरे के साथ एकदम परफेक्ट थे। हमारी रिलेशनशिप की खास बात ये थी कि हम दोनों एक दूसरे की बेहद केयर करते थे। जब कालेज खत्म हुआ तो हम दोनों की राहें अलग हो गई। लेकिन हमने फैसला किया कि हम इस रिश्ते को बनाए रखेंगे। 2500 मील की दूरी को अपने रिश्ते के बीच में न आने देने का फैसला हम दोनों के लिए बड़ा था। हम दोनों पहली बार अपने घर से बाहर निकलकर independently रहने जा रहे थे। हम दोनों की ही ज़िंदगी बदलने जा रही थी और उस बदलती ज़िंदगी में सिर्फ एक दूसरे के साथ ही था जो हमें secure महसूस करा रहा था। इंटरनेशनल कॉल, वाट्सएप और skype के जरिए हम दोनों एक दूसरे की physical कमी को भरने की कोशिश कर रहे थे।

 

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हर कुछ महीनों बाद ऋशि मुझसे मिलने आ जाता था और मैं खुशी के मारे उछल पड़ती थी। उसे देखते ही मैं उसे गले लगा लेती थी..सब जानते थे कि मैं प्यार में हूं...सब देख सकते थे कि मैं प्यार में हूं! लेकिन सिर्फ मैं ही जानती थी कि कई बार मुझे खुद इस प्यार पर शक होने लगता था। मुझे ये प्यार कम लगता था..मुझे लगता था कि ये प्यार मेरे लिए काफी नहीं है। कभी कभी मैं सोच में पड़ जाती थी कि क्या ऋषि ही वो इंसान है जिसके साथ मैं पूरी ज़िंदगी बिताना चाहती हूं??! और इस सवाल का कोई मजबूत जवाब मुझे नहीं मिल पाता था। लेकिन इसकी एक और वजह थी...ऋषि के लिए अपने प्यार पर खुद शक करने की एक वजह थी.. मैं किसी और से मिली थी..मेरी मुलाकात कबीर से हुई थी।

उससे मिलते ही मुझे कुछ खास महसूस हुआ था। वो जो भी सोचता था, जो भी कहता था, अपने past के बारे में, अपने future के बारे में, मुझे उसकी ओर खींच रहा था! वो उन चंद खास लोगों में से एक था जो जानते थे कि अपने आसपास रहने वालों की ज़िंदगी को कैसे बदला जा सकता है। उस इंसान ने समाज के उसूलों को चुनौती दी थी और वो उन पर खरा उतरा था। उसमें जो एनर्जी थी मैंने और किसी में नहीं देखी थी। कभी कभी ऐसा होता है न कि कुछ लोग आपकी ज़िंदगी में आते हैं और आपकी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल जाती है? कबीर मेरे लिए ऐसा ही इंसान साबित हुआ। उससे मिलने के बाद मैं वो सब काम करने लगी जो मुझे लगता था मैं कभी नहीं कर सकती। मैं दुनिया को उसकी नज़र से देखने लगी और मुझे दुनिया ज्यादा खूबसूरत नजर आने लगी। ये सब कुछ शायद वही था जिसकी मुझे तलाश थी।

मुझे ऐसे समय में किसी से प्यार हो गया था जब मैं पहले से किसी और के साथ रिलेशनशिप में थी...

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मुझे पता है ये सब दूसरों को कैसा लगेगा..ये सब कुछ मुझे ही अजीब और बहुत बुरा लग रहा था..लेकिन मैं कुछ नहीं कर पा रही थी! मैं कबीर के लिए जो फील कर रही थी उसे मैं रोक नहीं पा रही थी। मुझे लगने लगा था कि ऋषि के साथ वो सिर्फ दोस्ती ही थी जिसकी मुझे ऐसी आदत पड़ गई थी कि मैं उसे प्यार समझ बैठी थी...जिस पर अब मुझे सिर्फ guilty हो रही थी।

मैंने ये सब ऋषि को बताने की बहुत कोशिश की लेकिन नहीं बता पाई। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि उसे ये सब कैसे explain करुंगी- वो ये सब कभी नहीं समझेगा..और उसे समझना भी क्यों चाहिए? अगर मैं उसकी जगह होती तो मैं भी ये सब समझने से इनकार ही कर देती न?

मुझे लगा कि इन सबसे बचने के लिए मैं वापस अपने hometown चली जाती हूं...कबीर से दूर। लेकिन ज़िंदगी ने कुछ और ही प्लान कर रखा था। कबीर के साथ intimate moments में ली हुई एक फोटो पता नहीं कैसे ऋषि तक पहुंच गई और मेरे पास इस फोटो के लिए कोई जवाब नहीं था। उसे यकीन नहीं हो रहा था और मेरे लिए ये सब इतनी अचानक हुआ कि मैं इनकार भी नहीं कर पाई कि ये सब सच है या झूठ।

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मैंने ऋषि के साथ ब्रेकअप कर लिया। किसी के साथ होकर भी उसे प्यार न करना भी एक तरह का धोखा ही तो है। लेकिन मैंने कबीर से भी दूर होने का फैसला किया..जबकि मैं उसे प्यार करती थी। वो भी मेरी तरह किसी और के साथ एक रिलेशनशिप में था और मैं नहीं चाहती थी जैसे मेरा रिश्ता खत्म हुआ उसका भी हो।

इन सब चीजों से भागना बहुत मुश्किल था...जितना मैंने सोचा था उससे कहीं ज्यादा मुश्किल। मैंने अपने लिए और अपनी ज़िंदगी के लिए एक फैसला किया और कुछ समय के लिए किसी और के साथ रहने के बजाए सिर्फ अपने साथ रहने का decide किया।

इस बात को कुछ महीने बीत चुके थे। मैं खुद के साथ खुश हूं। किसी और के साथ होने से ज्यादा जरूरी खुद को समझना है। कम से कम मैं फिर कभी किसी कबीर के लिए किसी ऋषि को धोखा नहीं दूंगी। और अब अगर कोई कबीर मेरी ज़िंदगी में आया भी तो वो मेरे पैरों तले से मेरी ज़मीन खिसकाए बगैर मुझे आसमान में उड़ने दे सकता है।

Images: shutterstock

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Published on Mar 30, 2016
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