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#MyStory: वो सब सिर्फ एक Facebook Request से शुरू हुआ और...

कौन सोच सकता है कि किसी की ज़िंदगी फेसबुक पर आई एक friend request से बदल सकती है??!!

मैं उसे पहली बार एक रेस्टोरेंट में मिली थी...मिली थी मतलब..वो कोई मुलाकात जैसा मिलना नहीं था.. मेरी दोस्त उसे अपने भाई की वजह से जानती थी और वो दोनों वहां खड़े होकर बात कर रहे थे। मैं उसे अजीब सी नजरों से देख रही थी...मुझे नहीं पता क्यों...लेकिन उस वक्त मैं जो महसूस कर रही थी उसे बता पाना मुश्किल है क्योंकि इस बात पर यकीन करना भी मुश्किल है कि किसी को पहली बार देखने पर ही कोई ऐसा भी महसूस कर सकता है। वो भी मुझे देख रहा था...बार बार..पता नहीं वो क्या था..हम दोनों के बीच की कैमिस्ट्री, पहली नजर में हो रहा अट्रैक्शन या कुछ और...लेकिन कुछ अचानक से हो गया था हम दोनों के बीच। उसके बाद मैं उसके बारे में अक्सर सोचने लगी थी...कई महीनों तक। ये अजीब था क्योंकि मैं उससे सिर्फ एक बार मिली थी!!

एक दिन मैं अपनी कज़िन के साथ डिनर करने बाहर गई और किस्मत ने फिर एक बार अपना खेल दिखा दिया। एक स्टोर पर मैंने उसे देखा...मैं फौरन छुप गई और अपनी कज़िन को धीरे से बताया कि ये वही लड़का है। उस वक्त मैं कुछ और नहीं कह पाई क्योंकि मेरा दिल इतनी जोर से धड़क रहा था कि मैं खुद ही उस आवाज से डर गई थी।

उस पूरी शाम मैं यही सोचती रही कि ये किस्मत ही थी जिसने एक बार फिर हम दोनों को एक दूसरे के सामने ला कर खड़ा कर दिया था। इसलिए मैंने एक कदम आगे बढ़ाते हुए उसी रात उसे फेसबुक पर अपने दोस्तों की लिस्ट में एड कर लिया। मैंने उसे रिक्वेस्ट भेजी और उसने एक्सेप्ट कर ली। इसके बाद मैंने ही अगला कदम भी बढ़ा दिया...उसे मैसेज करके..अपनी एक दोस्त से सलाह मशवरा करके ये डिसाइड किया गया कि मैं मैसेज में क्या लिखूंगी!!

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मैंने अपनी जिस दोस्त से पूछा उसे इन सब काम का experience था इसलिए उसने खुद ही मुझे मैसेज टाइप करके भेज दिया जिसे मैंने सीधा कॉपी-पेस्ट किया और उसे भेज दिया...बिना कुछ ज्यादा सोचे और समझे। अगले 10 मिनट मेरे लिए किसी जन्म-मृत्यु से कम नहीं थे। मैं तब 16 साल की थी और वो 19 साल का। मुझे लग रहा था कि अगर उसने उस मैसेज का जवाब नहीं दिया तो मैं मर ही जाऊंगी!

उसने जवाब दिया। हम दोनों फेसबुक पर चैट की जिसका एक एक शब्द मुझे आज भी याद है। उसके बाद हम दोनों ने अपने ईमेल एड्रेस एक दूसरे को दिए ताकि हम दोनों MSN पर बात कर सके (ये बात 8 साल पुरानी है...) गर्मियां बीत चुकी थी और हम दोनों एक दूसरे के टच में थे। वो मुझे कभी कभी फोन भी करता था..मुझे याद है मैं कैसे उससे फोन पर खुसर-फुसर करके बात करती थी और सुबह सुबह फोन पर की वो बातें आज भी मेरे चेहरे पर मुस्कान ले आती है। मैं उसे पागलों की तरह प्यार करने लगी थी।

वो मुंबई में था और मैं दिल्ली में। हालांकि वो दिल्ली में पढ़ाई कर रहा था और एक हफ्ते में ही वापस आने वाला था। इसलिए ये ज़ाहिर था कि हम जो अब तक virtually साथ थे अब मिलेंगी ही।

 

my-story-datingमेरे दिल में बहुत कुछ चल रहा था। हम दोनों मिलने का समय तय कर लिया था और उस मुलाकात से एक रात पहले मैं जैसे हवा में उड़ रही थी। अगले दिन मैं कुछ जल्दी ही वहां पहुंच गई। मैं इतनी घबराई हुई थी कि वहीं McDonalds’ के कोने में जाकर छुप गई। वो मेरी पहली डेट थी। कुछ देर बाद वो आया और मैं हिम्मत करके उसके सामने गई। हम दोनों ने फिल्म देखने का फैसला किया...कुछ देर इस बात पर बहस हुई कि टिकट के पैसे कौन देगा...फिर उसने दिए और मैं ये सोचकर ही खुशी से उछल पड़ी की ये मेरी पहली डेट है।

“मुझे नहीं पता था कि तुम braces पहनती हो”

ये उसके वो पहले शब्द थे जो उसने मुझे कहे...हम सिनेमा हॉल की तरफ जा रहे थे जब उसने मुझे ये कहा। मेरा मन हुआ कि यहीं से कूद जाऊं....और फिर कभी उसके सामने ने आऊं!!

“Oh…” बस इतना ही कह पाई मैं

“चलो कोई बात नहीं..अब पता चल गया,” उसने आराम से जवाब दिया..मुस्कुराते हुए।

हम दोनों ने साथ में फिल्म देखी..एक साथ हंसे..उसने मुझे माथे पर किस किया और मुझे यकीन हो गया कि मैं इस लड़के से बहुत बहुत प्यार करती हूं। अगली रात हम फिर मिले और हम दोनों के बीच पहली kiss हुई। मेरे घर की सीढ़ियों पर वो हुआ और मैं आज भी वहां से गुजरती हूं तो वो पल याद आ जाता है।

ये छोटी छोटी आउटिंग कुछ समय तक यूं ही चलती रही। हम रेस्टोरेंट में जाकर खाते पीते, खूब फिल्में देखते, आइसक्रीम खाते हुए ढेर सारी गप्पें मारते। लेकिन हम दोनों की उम्र में फर्क और अलग अलग लाइफस्टाइल होने की वजह से कुछ था जो missing था। उन मुलाकातों का कोई नतीजा नहीं निकला। वो वापस मुंबई चला गया और मैंने भी अपना स्कूल का आखिरी साल खत्म किया। लेकिन एक भी सेकंड ऐसा नहीं जाता था जब मैं उसके बारे में नहीं सोच रही होती। और ये बात सबको पता भी चल चुकी थी क्योंकि मैं हर बात में कहीं न कहीं से उसका जिक्र ले ही आती थी।

Of course, जैसे जैसे समय बीता हम दोनों ही अलग अलग लोगों को डेट करने लगे। हालांकि हम दोनों अब भी टच में थे। नए लड़के के साथ मेरी रिलेशनशिप फेल हो गई और इसके लिए मैं काफी हद तक उसे ही जिम्मेदार मानती हूं क्योंकि मैं आज भी सिर्फ उसी से प्यार करती थी। इसलिए मैं नहीं चाहती थी कि अब मैं किसी नए रिलेशनशिप में जाऊं क्योंकि उस लड़के के साथ भी सही नहीं होगा। लेकिन शायद आप धीरे धीरे ही सब सीखते हो।

मुझे आज भी याद है जब उसने पहली बार मुझसे कहा था कि वो मुझे प्यार करता है। हमारी दिल्ली की उन मुलाकातों के करीब एक साल बाद एक रात उसने मुझे फोन किया..वो शायद पूरी तरह होश में नहीं था..उसने कहा वो मुझे कुछ बताना चाहता है और ये भी कहा कि वो शायद ये बात दुबारा कभी नहीं कहेगा.. “I love you.” मैंने इतने साल उसके मुंह से ये तीन शब्द सुनने के लिए इंतजार किया था...मैंने फौरन उसे फौरन I love you too कहा। उसने चौंकते हुए कहा, “ओह! मैं तुमसे ये उम्मीद नहीं कर रहा था।” अगली रात उसने फिर फोन किया और वही तीन शब्द कहे...बार-बार...कई बार।

हमारे बीच फोन का ये सिलसिला बढ़ने लगा और हम अक्सर Skype पर भी बात करने लगे। मेरी युनिवर्सिटी की पढ़ाई खत्म होने वाली थी और उसकी वहां एक girlfriend थी। मैं भी किसी को दो साल से डेट कर रही थी...लेकिन हम दोनों का रिश्ता दूर रहते हुए भी इतना मजबूत हो चुका था कि मैं कुछ और सोच ही नहीं पा रही थी।

 

my-story-if-youre-readingउसका और उसकी girlfriend का ब्रेकअप हो गया। किस बात पर हुआ ये मुझे याद नहीं क्योंकि मैं इस दिन का इतनी बेसब्री से इंतजार कर रही थी कि मुझे याद ही नहीं कि उसने क्या वजह बताई। हालांकि मैं उसके बाद भी कुछ महीनों तक डेट करती रही लेकिन कुछ टाइम बाद मेरा भी अपने ब्वॉयफ्रेंड से ब्रेकअप हो गया।

लेकिन इससे हम दोनों के बीच कुछ नही बदला। हम दोनों पहले ही तरह दोस्त बने रहे और हमारा रिश्ता और मजबूत होता गया। लेकिन हमारे बीच बहुत ज्यादा लड़ाइयां भी होने लगी थी..मुझे गुस्सा आ रहा था कि हमारे बीच कुछ और...कुछ ज्यादा क्यों नहीं हो रहा। वो हमेशा इसकी वजह बताता था कि हम दोनों अलग अलग शहरों में हैं इसलिए। एक दिन हम दोनों के बीच इतनी जबरदस्त लड़ाई हुई कि मैं बरदाश्त नहीं कर पाई और हमने बात करनी बंद कर दी।

पिछले 6 साल में वो पहली बार था जब मुझे वो important नहीं लग रहा था।

लेकिन ये लड़ाई ज्यादा दिन नहीं टिकी। फेसबुक ने एक बार फिर अपनी रोल अदा किया। इस बार उसने मुझे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी और मैसेज किया। मेरा उसे reply करने का मन नहीं किया लेकिन मेरी उंगलियों ने इससे पहले ही अपना फैसला कर लिया था और उसे जवाब भी दे दिया था।

दो साल पहले आखिरकार हम दोनों ने एक दूसरे को डेट करना शुरू किया। यही वो चीज थी जो मैं चाहती थी..मैं चाहती थी कि हमारे बीच ऐसा ही हो और शायद वो भी यही चाहता था। मैं खुश थी। मैं उस इंसान के साथ थी जिसने मेरी जिंदगी बदल दी थी, जिसने मुझे बेहतर इंसान बनाया था और जो इस जिंदगी में मेरा सब कुछ हो चुका था।

लेकिन जिंदगी बड़ी अजीब है। जब हम दोनों को एक दूसरे के साथ वक्त मिलना शुरू हुआ...दूसरी चीजों ने हमसे वक्त मांगना शुरू कर दिया। मेरी फैमिली और उसका काम...हमसे हमारा वक्त चुराने लगे...और हमारा वो रिश्ता जिसके हमने खुद बनाया था...टूट गया।

Images: shutterstock.com

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Published on Feb 05, 2016
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