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#MyStory: हमारा रिश्ता Perfect था लेकिन समय नहीं…

मेरा कालेज खत्म हुआ ही था। कालेज के बाद गर्मियों की छुट्टियां थी। चार साल विदेश में पढ़ाई करने के बाद मैं भारत वापस आई थी। मुझे यहां अब बहुत कुछ अलग लग रहा था, अजीब लग रहा था। हालांकि मैंने यहीं से पढ़ाई की थी और बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई करने की वजह से मेरे दोस्त इंडिया में हर जगह थे। मैं वापस दिल्ली आकर रहने का फैसला किया था। मैं इतने साल अपने परिवार से दूर रही थी इसलिए सोचा कि अब उनके आसपास रहूंगी तो सेटल होने में आसानी होगी।

मैं हमेशा से बहुत ambitious थी। मैं ज़िदगी में कुछ करना चाहती थी, कुछ पाना चाहती थी, अपने दम पर कुछ होना चाहती थी। इसलिए मैंने यहां आते ही काम करना शुरू कर दिया। मैंने एक NGO ज्वाइन किया जहां में 9 से 12 घंटे तक काम करती थी। लगभग सारा दिन वहां काम करने के बाद अब मेरे पास इतना वक्त ही नहीं था कि कुछ और कर सकूं, नए लोगों से मिल सकूं या नए दोस्त बना सकूं। मेरा मिलना जुलना सिर्फ उन्हीं लोगों तक रह गया था जिनके साथ मैं काम करती थी....शायद मैं खुशनसीब थी।

उसका नाम रोहन था। नौकरी शुरू करने के कुछ ही हफ्ते बाद मैं उससे मिली। मैंने जब एनजीओ ज्वाइन किया तो वो किसी काम से शहर से बाहर गया हुआ था तो उस समय उससे मिलना नहीं हो पाया। रोहन मुझे बहुत ही प्यारा लगा, वो बहुत समझदार था। कब क्या कहना है, कैसे कहना है, उसे पता था। मैंने नोटिस किया कि वहां काम करने वाली सभी लड़कियां से पसंद करती हैं। अपने काम को लेकर वो बहुत passionate था। इसलिए किसी से भी कहीं ज्यादा घंटे काम करता था। लेकिन इसके साथ ही वो enjoy करना भी जानता था और कोशिश करता था कि उसके आसपास के लोग भी enjoy करें।

कुछ ही हफ्तों में हम दोनों अच्छे दोस्त बन गए। हम दोनों घंटों साथ करते थे और फिर काम के बाद बाहर मस्ती करने भी साथ जाते थे। जल्दी ही मेरी दोस्ती उसके सब दोस्तों से भी हो गई।

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मुझे लगने लगा कि अब तक मैं जितने भी लड़कों से मिली हूं रोहन उन सब से अलग है...सबसे अच्छा है। लेकिन मैं sure नहीं थी कि इस वक्त मैं इस दोस्ती से ज्यादा भी कुछ और चाहती थी या नहीं। उसने इस रिश्ते में आगे बढ़ने के लिए भी जब पूछा तो मैंने उसे सच बता दिया कि मैं अभी sure नहीं हूं और सिर्फ दोस्त बने रहना चाहती हूं। उसने इस बात को accept किया और हमारी दोस्ती बनी रही। वो मेरे बारे में क्या फील करता है इससे हमारी दोस्ती में कोई फर्क नहीं आया। किसे पता था कि उसकी उन बातों के कुछ ही दिन बाद ही मेरा मन भी बदल जाएगा!

एक शाम उसने मुझसे काम के बाद ड्रिंक पर चलने को पूछा। मैंने हां कर दी। उस शाम भी बस हम दोनों ही थे...इससे पहले भी हम कई शामें एक साथ अकेले गुज़ार चुके थे। हम यूं ही यहां-वहां की बातें कर रहे थे जब बात करते करते वो मेरी ओर बढ़ा और उसने मुझे kiss कर लिया। मैं इसके लिए तैयार नहीं थी और मेरा रिएक्शन देखकर वो पीछे की ओर हट गया...वो मुझे हैरान हो कर देख रहा था। मैं उसकी तरफ झुकी और उसे वापस kiss कर लिया। उस वक्त....मुझे वही ठीक लगा...वो सब..बस हो गया। उस वक्त मुझे ऐसा लगा कि ये काफी पहले ही हो जाना चाहिए था। मैं उसे एक दोस्त की तरह प्यार करती थी और मैंने सच में कभी उसके लिए romantically नहीं सोचा था...लेकिन शायद मैं गलत थी! उस एक kiss ने मुझे ये महसूस कराया कि शायद मैं भी उसे प्यार करने लगी थी, लेकिन समझ नहीं पा रही थी।

उसके बाद हम दोनों और करीब आ गए। मुझे उससे बेइंतहा प्यार हो गया था और वो तो मुझे प्यार करता ही था। सारी चीजें ठीक चल रही थी और हम दोनों एक दूसरे के साथ खुश थे। लेकिन शायद कुछ चीजें...कुछ खुशियां किस्मत में नहीं होती।

दिसंबर में मैंने महसूस किया कि वो हमेशा परेशान और tensed रहने लगा है। वो बदल सा गया था। हमेशा खुश रहने वाला रोहन मायूस सा रहने लगा था। मैंने उससे कई बार इसकी वजह पूछी लेकिन उसने बताने से इनकार कर दिया। उसका behaviour लगातार बदलने लगा। उसे बहुत जल्दी गुस्सा आने लगा, बात बात पर चिढ़ जाता था और patience तो जैसे खत्म ही हो गया था। अगर मैं उससे छोटा सा भी सवाल करती थी तो भी उससे इतनी तेज गुस्सा आता था कि मैं हैरान रह जाती थी। मैंने इससे पहले कभी उसे ऐसा नहीं देखा था। बल्कि मैं कभी सोच भी नहीं सकती थी कि उस जैसा शांत रहने वाला इंसान इस तरह से भी react कर सकता है। हमारी लड़ाइयां होने लगी...हमेशा। इन सब से मैं भी परेशान रहने लगी..मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है।

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कुछ दिन बाद आखिर उसने मुझे बताया। उसके पेरेंट्स के बीच काफी समय से problems चल रही थी और अब उन दोनों के बीच divorce होने वाला था। अब मुझे उसके उस अजीब से behaviour की वजह समझ आ गई थी और इस मुश्किल समय में मैं उसके साथ रहना चाहती थी। मैं समझ सकती थी कि अपने मां-बाप के बीच ये सब होता देख उसे कैसा लग रहा होगा...हम चाहे कितने भी बड़े क्यों न हो जाए अपने मां-बाप को अलग होते देखना बहुत तकलीफ भरा होता है। इसलिए मैं उसका साथ देना चाहती थी वो जिस तरह भी चाहे..उस तरह।

लेकिन चीजें और खराब होने लगी थी। वो दिन-ब-दिन और ज्यादा moody होने लगा था। हालांकि अपने दोस्तों के साथ वो ठीक रहता था लेकिन मेरे पास आते ही पता नहीं उसे क्या हो जाता था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या गलत कर रही हूं। शायद वो और किसी को भी अपनी feelings नहीं दिखाना चाहता था। शायद वो अपने emotions को लेकर सिर्फ मुझ पर भरोसा कर रहा था...मैं इसी तरह खुद को समझाने की कोशिश कर रही थी। लेकिन ये सब महीनों तक चलता रहा। उसका वो खराब behaviour सिर्फ मेरे साथ होता था.. बाकी सबके साथ वो पहले जैसा ही था इसलिए किसी और वो बदला हुआ लग ही नहीं रहा था...सिवाए मेरे।

हमारे बीच लड़ाइयां पहले से ज्यादा होने लगी थी। उसके मुताबिक मैं बहुत selfish हो थी क्योंकि मैं उसके साथ कोई sympathy नहीं दिखा रही थी। मुझे लगने लगा था कि वो मुझे और मेरी feelings को granted ले रहा है। मैं तो वही थी जो पहले थी...वो बदल गया था..लेकिन उसके हालात भी तो बदल रहे थे।

जो कुछ हो रहा था उसके लिए मैं उसे दोष नहीं दे रही थी। मैं कैसे दे सकती थी? वो ऐसे हालातों से जूझ रहा था जो उसे अंदर से तोड़ रहे थे। मैं हालांकि उसके पेरेंट्स से कभी मिली नहीं थी लेकिन वो जिस तरह से उनके बारे में बात करता था मैं बता सकती थी कि वो उन्हें कितना प्यार करता है और उसे हमेशा इस बात पर गर्व होता था कि उसके पेरेंट्स के बीच बहुत प्यार है। उस वक्त वो खुद अपने emotions का सामना नहीं कर पा रहा था तो मेरे emotions का क्या करता।

शायद वो समय ही बहुत खराब था। उस तीन महीने की रिलेशनशिप में मुझे लगने लगा था कि ये हमेशा ऐसी ही रहेगी लेकिन ऐसा नहीं हो रहा था। मैं देख रही थी कि वो भी इस रिलेशनशिप को बनाए रखने की कोशिश कर रहा था लेकिन हम दोनों में से कोई भी कुछ नहीं कर पा रहा था। मैंने उसे कुछ भी कहना बंद कर दिया..मैं अपनी feelings छुपाने लगी।

इसी तरह तीन महीने और बीत गए। वो अब भी सिर्फ मेरे साथ ही बुरा बर्ताव कर रहा था, बाकी सब के साथ वो पहले जैसा हंसमुख और अच्छा था। मैं अकेली थी जो उसके बुरे शब्द सुनती थी और उसके गुस्से का सामना करती थी। ये सब अब रोजाना की बात हो गई थी और हम दोनों में से कोई भी अपने गुस्से पर काबू रखने में नाकामयाब हो चुका था।

हम दोनों को पता था कि अब सब कुछ खत्म होने की नौबत आ चुकी है। हम दोनों एक दूसरे को बहुत प्यार करते थे, हम दोनों को लगता था कि हम ही एक दूसरे की जिंदगी का सबसे गहरा प्यार हैं। लेकिन शायद वो वक्त हमारा नहीं था...हम दोनों एक दूसरे की परेशानियां दूर नहीं कर रहे थे बल्कि उन्हें बढ़ा ही रहे थे। वो मेरी जिंदगी का सबसे मुश्किल फैसला था...लेकिन शायद वो goodbye कहने का समय ही था।

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मैं आज भी उसके बारे में सोचती हूं और मुझे पता है वो भी मेरे बारे में सोचता होगा। उस जैसा प्यार मिलना मुश्किल है। हम दोनों साथ में अच्छे लगते थे। हम दोनों के बीच की chemistry सिर्फ किताबों और फिल्मों में देखने को मिलती है। सब कुछ परफेक्ट था....सिवाए उस समय के।

शायद हमारे बीच वो सब ही होना था। अगर मैं उम्र के किसी और पड़ाव में मिले थे..थोड़े और mature होते तो शायद चीजों को संभाल पाते। लेकिन अब शायद ये पता भी नहीं चलेगा कि अगर ऐसा होता तो क्या होता...या शायद हमें पता चले...। शायद हम दुबारा कभी मिलें...और शायद इस बार समय भी हमारे साथ हो।

Images: shutterstock

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Published on Dec 23, 2015
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